राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षा को समग्र, समावेशी, मूल्यपरक, कौशल-आधारित, बहुविषयक तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा से संबद्ध बनाना है। नीति विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के विकास पर बल देती है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (2023-24) के अनुसार देश में 14,71,891 विद्यालय, 24.80 करोड़ विद्यार्थी और 98.08 लाख शिक्षक थे। इनमें 10,17,660 सरकारी विद्यालय शामिल थे। ये आँकड़े गुणवत्तापूर्ण, मूल्यपरक और उत्तरदायी शिक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। प्रस्तुत अ/ययन का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में युवा दायित्व की अवधारणा का विश्लेषण करना तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह के साहित्यिक एवं शैक्षिक विचारों की समकालीन प्रासंगिकता को समझना है। अ/ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति के मा/यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधिकारिक दस्तावेजों तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह की प्रमुख साहित्यिक एवं वैचारिक कृतियों का अ/ययन किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 2035 तक 50 प्रतिशत करने तथा बहुविषयक एवं समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित करती है। अ/ययन से स्पष्ट होता है कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह के विचारों में शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का मा/यम नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, नैतिकता, सामाजिक चेतना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करने का साधन है। उनके विचारों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, सेवा-भाव, अनुशासन, राष्ट्रीय एकता और जिम्मेदार नागरिकता को महत्व दिया गया है। ये मूल्य वर्तमान युवा पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक सहभागिता के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी शिक्षा को जीवन-मूल्यों, कौशल, जिम्मेदार नागरिकता, भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति तथा समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ती है। अतः डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह के साहित्यिक एवं शैक्षिक विचारों का समकालीन पुनर्पाठ युवाओं में नैतिक चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रबोध और जिम्मेदार नागरिकता के विकास को समझने में उपयोगी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यापक शैक्षिक लक्ष्यों के संदर्भ में इन विचारों का समन्वय भारतीय शिक्षा में मूल्यपरकता, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता है।
1. भाषा का समाजशस्त्र डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, राजकमल प्रकाशन, प्रा.लि. पटना-800006
2. भाषा साहित्य और इतिहास का पुनर्पाठ-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली-110063
3. हिंदी साहित्य प्रसंगवश डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, जागृति साहित्य प्रकाशन, पटना-800006
4. साहित्य में लोकतंत्र की आवाज, सम्पादक राजेन्द्र प्रसाद सिंह, संजय नवले, साहित्य संसद, नई दिल्ली-110045
5. हिंदी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, गौतम बुक सेंटर, शाहदरा, दिल्ली-110093
6. हिंदी की लंबी कविताओं का आलोचना पक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली-110002
7. समाज भाषाशास्त्री, राजेन्द्र प्रसाद सिंह-संपादक-शशिकला जय भारती प्रकाशन 267-बी, मुलीगंज, इलाहाबाद-211003
8. हिंदी का अस्मितामूलक साहित्य और अस्मिताकार- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, अमन प्रकाशन, कानपुर-12 (उ.प्र.)
9. इतिहास का मुआयना-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली-110063
10. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020. शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्लीरू भारत सरकार, 2020, पृ. 3
11. एस. के. कपूर. द स्टेट ऑफ एजुकेशन इन इंडिया इन द लाइट ऑफ स्वामी विवेकानंदस आइडिआज. इन विवेकानंद एज द टर्निंग पॉइंट, कोलकातारूअद्वैत आश्रम, 2013, पृ. 184-196.
12. ए. भट्टाचार्य एवं एस. के. दिआबाग. रेविसिटिंग स्वामी विवेकानंदस एजुकेशनल विजन इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ इंडिआज एनईपी 2020. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च, 7(3), 2025, 1-6.