पृथ्वी के चारो तरफ कई सौ किलोमीटर की मोटाई में व्याप्त गैसीय आवरण को ’वायु मण्डल’ कहा जाता है। पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण ही यह वायुमण्डल उसके साथ टिका हुआ है। पृथ्वी की सतह पर विभिन्न प्रकार के जीवों का अस्तित्व इसी वायुमण्डल के कारण ही सम्भव होता है। सामान्य रूप में वायुमण्डल में कई प्रकार की गैसों का यांत्रिक सम्मिश्रण होता है। यद्यपि वायुमण्डल के संगठन में कई गैसों का योगदान होता है, परन्तु इसमें 99ः भाग का लेवल नाइट्रोजन (78ः) तथा ऑक्सीजन (21ः) का ही रहता है। शेष 1ः का प्रतिनिधित्व आर्गन कार्बन-डाई-ऑक्साइड हाइड्रोजन नियोन हीलियम क्रिप्टोन, जेनान ओजोन आदि भारी तथा हल्की गैसों द्वारा होता है।
1. पर्यावरण भूगोल- वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा।
2. भौतिक भूगोल - सविन्द्र सिंह।
3. इंटरनेट।
4. ESRI Library
5. विषय से सम्बन्धित भूगोल की पत्र-पत्रिकाएँ।