वर्तमान डिजिटल युग में बैंकिंग प्रणाली में तीव्र गति से आधुनीक प्रौद्योगिकी के अनुसार परिवर्तन हो रहे हैँ। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, एटीएम, त्वरित भुगतान प्रणाली तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग सेवाओं ने बैंकिंग कार्यों को अधिक सरल, तीव्र एवं सुविधाजनक बनाया है। लेकिन इसके विपरीत डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, मुख्य पहचान की चोरी, फिशिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर, अनधिकृत लेन-देन तथा ग्राहक संबंधी संवेदनशील सूचनाओं के दुरुपयोग जैसे साइबर जोखिमों में भी वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में बैंकों की भूमिका केवल वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह जाती है बल्कि उन्हें सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल बैंकिंग वातावरण विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों के लिए साइबर सुरक्षा एवं साइबर लचीलापन संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष बल दिया जा रहा है। इनमें बोर्ड-स्तरीय निगरानी, वास्तविक अथवा लगभग वास्तविक समय में सुरक्षा घटनाओं की निगरानी, साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र, जोखिम प्रबंधन तथा घटना की प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण उपाय देखने को मिल रहे हैं। इसी के साथ-साथ भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) साइबर घटनाओं की सूचना, विश्लेषण, चेतावनी तथा साइबर घटना की प्रतिक्रिया के समन्वय में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह शोध-पत्र साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने में बैंकों की भूमिका का विश्लेषण कर सकता है तथा तकनीकी सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक जागरूकता, कर्मचारी प्रशिक्षण, साइबर निगरानी, घटना प्रतिक्रिया और विनियामकीय अनुपालना के मा/यम से बैंकिंग क्षेत्र में साइबर लचीलापन विकसित करने के उपायों को प्रकाशित भी कर सकता है।