ISO 9001:2015

INSPIRA-JOURNAL OF COMMERCE,ECONOMICS & COMPUTER SCIENCE(JCECS) [ Vol. 12 | No. 3 | July - September, 2026 ]

21वीं सदी में भारत-जापान संबंधों का एक नया दौरः एक विश्लेषणात्मक अ/ययन

देवी लाल एवं डॉ. सुलोचना (Devi Lal & Dr. Sulochana)

वर्तमान शोध पत्र 21वीं सदी में भारत एवं जापान के बीच विकसित हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का विश्लेषणात्मक अ/ययन प्रस्तुत करता है। वर्ष 2000 में ‘वैश्विक साझेदारी’ से आरंभ होकर 2014 में ‘विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी’ तक की यात्रा इन संबंधों के गहराने एवं बहुआयामी होने का प्रमाण है। यह अ/ययन आर्थिक, रणनीतिक-रक्षा, परमाणु, बुनियादी ढाँचा, हिंद-प्रशांत एवं सांस्कृतिक आयामों पर केंद्रित है। द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2020-21 में 15.33 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 27.47 अरब डॉलर तक पहुँचा है। जापान भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय विकास सहयोगी है तथा उसकी संचयी व्क्। प्रतिबद्धता 6.978 खरब येन से अधिक है। मुंबई-अहमदाबाद उच्च-गति रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना, ।ब्ै। जैसे रक्षा समझौते, परमाणु सहयोग समझौता (2016) तथा क्वाड (फन्।क्) का पुनरुज्जीवन इस ‘नए दौर’ के प्रमुख स्तंभ हैं। 2025 में दोनों देशों ने ‘अगले दशक के लिए संयुक्त दृष्टि (2025-2035) जारी की तथा जापान से भारत में 10 खरब येन (लगभग 67 अरब डॉलर) के निजी निवेश का नया लक्ष्य निर्धारित किया। यह शोध पत्र द्वितीयक डेटा पर आधारित है तथा इन विकासों के रणनीतिक निहितार्थों को समझने का प्रयास करता है।


DOI:

Article DOI:

DOI URL:


Download Full Paper:

Download