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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 3 (I) | July-September, 2026 ]

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का वर्तमान परिदृश्य तथा भविष्य की सम्भावनाएँ

डॉ. सन्तोष कुमार कुण्डारा, डॉ. विपुल कुमार परेवा एवं सुमन रमन (Dr. Santosh Kumar Kundara, Dr. Vipul Kumar Parewa & Suman Raman)

ऊर्जा तथा ऊर्जा स्त्रोत मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। आर्थिक तथा सामाजिक विकास, ऊर्जा स्त्रोतों पर ही निर्भर है। परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों जैसे कोयला, पेट्रोल तथा गैस के द्वारा सभी आवश्यकताओं की पूर्ति की जा रही है लेकिन सीमित उपलब्धता और पर्यावरण प्रदूषण की बढ़ती समस्या के कारण नये ऊर्जा स्त्रोतों को खोजना तथा विकसित करना जरूरी हो गया है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह जरूरी है कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखकर विकास के मार्ग पर अग्रसर रहें। अतः उपलब्ध नवीकरणीय स्त्रोतों का उचित उपयोग जरूरी है ताकि लंबे समय तक ऊर्जा उपलब्धता रहे। आर्थिक विकास को गति प्रदान करने, रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने तथा अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों का विकास किया जा रहा है तथा इस क्षेत्र में निरंतर सफलताएं प्राप्त की जा रही है। विभिन्न राज्यों की भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा स्त्रोतों की उपलब्धता के आधार पर सौर ऊर्जा क्षेत्र, पवन ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा तथा अन्य ऊर्जा क्षेत्र में विकास किया गया है। भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उचित उपाय लगातार किए जा रहे है।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.3(I).9243

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/8.3(I).9243


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