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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 3 (I) | July-September, 2026 ]

‘‘नगाड़ा’’ - ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में विवेचनात्मक अध्ययन

डॉ. ललित कुमार पंवार (Dr. Lalit Kumar Panwar)

नगाड़ा भारतीय लोक एवं शास्त्रीय परंपरा का एक प्राचीन तालवाद्य है, जिसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों, राजकीय घोषणाओं, युद्ध, लोकनाट्य तथा सांस्कृतिक आयोजनों में प्राचीन काल से होता रहा है। प्रस्तुत अध्ययन में नगाड़े की उत्पत्ति, ऐतिहासिक विकास, संरचना तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों में उसके प्रयोग का विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है। शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि नगाड़ा केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, सामुदायिक जीवन एवं लोक परंपराओं का सशक्त प्रतीक है। साथ ही, आधुनिक समय में इसके बदलते स्वरूप, संरक्षण की आवश्यकता तथा सांस्कृतिक महत्त्व पर भी प्रकाश डाला गया है। यह अध्ययन भारतीय संगीत एवं लोक-संस्कृति के ऐतिहासिक विकास को समझने में उपयोगी सिद्ध होगा।

1.    मारवाड़ का इतिहास, पण्डित विश्वेश्वरनाथ रेउ, पृष्ठ-168।
2.    कवितावली, तुलसीदास जी।
3.    टॉड कृत राजस्थान भाग-2। 
4.    शुद्धि चंद्रोदय पृष्ठ संख्या-55।
5.    जयमल वंश प्रकाश भाग-पृष्ठ संख्या 181।
6.    सेंसर रिपोर्ट मारवाड़ सन् 1891 ई. पृष्ठ संख्या 370।
7.    तवारीख किशनगढ़।
8.    राज परिजन परिचय, रमेशचन्द्र गुणार्थी, पृष्ठ 84-88।
9.    अकबरी दरबार भाग-1, पृष्ठ संख्या 313।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.3(I).9224

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