वर्तमान समय में शिक्षा के पूरे परिदृश्य में बदलाव आया है जिसका मुख्य कारण वैश्वीकरण और सूचना क्रांति है। आज के समय में प्रत्येक क्षेत्र का डिजिटलाइजेषन हो रहा है। जिस कारण मा/यमिक विद्यालयों में पारंपरिक शिक्षण में परिवर्तन हुआ है, जिससे वे एक रणनीतिक व्यावसायिक इकाई (Strategic Business Unit) की तरह काम कर रहे हैं। इस डिजिटलाइजेषन से शिक्षा की गुणवत्ता तय करने के लिए स्कूलों में कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) जैसे ई-संसाधनों (E-Resources) को सबसे बड़े आधार बना चुके हैं। प्रस्तुत वैचारिक अ/ययन व्यावसायिक प्रशासन के सिद्धांतों के प्रकाष में मा/यमिक विद्यालयों में इन डिजिटल संसाधनों को न केवल उपलब्ध कराने में, बल्कि शिक्षण कार्य में उनका रोजमर्रा का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने में विद्यालय प्रबंधन (School Management) की क्या भूमिका हैं का विश्लेषण करता है। इस अध्ययन में लूथर गुलिक के पोस्डकॉर्ब (POSDCORB) प्रतिमान, हेनरी फेयोल के प्रबंधकीय सिद्धांतों को वैचारिक आधार बनाया गया है। अक्सर देखा गया है कि स्कूल बड़ी मात्रा में बजट खर्च करके तकनीकी उपकरण तो खरीदते हैं, लेकिन स्कूलों में उनके उपयोग सक सम्बन्धित उचित योजना और कुशल नेतृत्व का अभाव पाया जाता है जिससे वे संसाधन बेकार पड़े रहते हैं। विभिन्न शोध पत्रों और नीतिगत दस्तावेजों के विश्लेषण से यह अ/ययन निष्कर्ष निकालता है कि तकनीकी बुनियादी ढांचे पर किए गए भारी निवेश का असली फायदा (Return on Investment & ROI ) तभी मिल सकता है, जब विद्यालय प्रबंधन सक्रिय भूमिका निभाए। इसके लिए प्रबंधन को दूरदर्शी वित्तीय योजना बनानी चाहिए, तकनीकी खराबी के समय को कम करना होगा और सबसे महत्वपूर्ण बात शिक्षकों के मन से तकनीक का डर (Technophobia) दूर करके उनका क्षमता संवर्धन (Upskilling ) करना होगा। अंततः, यह लेख रेखांकित करता है कि जब तक प्रबंधन एक कुशल प्रबंधक और मार्गदर्शक की तरह काम नहीं करेगा, तब तक डिजिटल विभाजन को पाटकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अंतिम छात्र तक पहुँचाना संभव नहीं होगा।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.2(II).9134