राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शब्दों में स्थानीय स्वशासन ‘यदि भारत को अपना विकास करना है तो उसे बहुत सी चीजों का विकेन्द्रीकरण करना पड़ेगा, केन्द्रीयकरण को कायम रखने के लिए हिंसा बल अनिवार्य है, जो में नही चाहता।’ प्रस्तुत शोध पत्र म.प्र. में स्थानीय निकाय की आर्थिक स्थिती, राजस्व स्त्रोत, प्रशासनिक प्रणाली का अ/ययन करनें पर आधारित है। केन्द्र सरकार द्वारा निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान करनें के पश्चात् उनकी आर्थिक स्थिती को मजबुत करनें के लिए राजस्व वसूली एवं अन्य अधिकार प्रदाय किये हैं, उसके पश्चात् भी निकाय वित्तीय एवं प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उक्त अ/ययन का उद्देश्य स्थानीय निकाय की शासन पर निर्भरता को जाननें में एवं नागरिक सुविधाओं के कुशलतम क्रियान्वयन का विश्लेषण करता है।
1. म.प्र. नगरपालिक निगम अधिनियम 1956 एवं म.प्र. नगरपालिका अधिनियम 1961।
2. शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाईट एवं विभिन्न दिशा निर्देश।
3. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की वेबसाईट एवं दिशा निर्देश।
4. Richa Pandey and Dr. Ramsiya Charmkar, नगरीय स्वशासी संस्थाओं द्वारा विकास कार्यो के क्रियान्वय की स्थितिः एक अ/ययन (म.प्र. के कटनी जिले के विशेष सन्दर्भ में)।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.2(I).9106