21वीं सदी में भारतदृरूस संबंध अंतरराष्ट्रीय राजनीति की सबसे स्थायी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक रहे हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक परिवेश में व्यापक परिवर्तनों के बावजूद दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान तथा बहुपक्षीय कूटनीति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को निरंतर सुदृढ़ किया है। यह संबंध पारस्परिक विश्वास, साझा रणनीतिक हितों तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित है। यह शोध-पत्र 21वीं सदी में भारतदृरूस संबंधों के विकास का विश्लेषण करता है तथा उन प्रमुख घटनाओं, अवसरों और चुनौतियों का अध्ययन प्रस्तुत करता है जिन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है। यथार्थवादी एवं रणनीतिक दृष्टिकोणों के आधार पर यह अध्ययन इस बात की पड़ताल करता है कि दोनों देशों ने चीन के उदय, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों तथा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति-संतुलन के परिवर्तन जैसी उभरती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप अपनी साझेदारी को किस प्रकार अनुकूलित किया है। शोध में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा तथा कूटनीतिक समन्वय की भूमिका का भी मूल्यांकन किया गया है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि भारतदृरूस संबंध भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं तथा क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक रणनीतिक संतुलन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.2(II).9037