यह शोध पत्र राजस्थान राज्य के अलवर जिले की बानसूर तहसील में वर्ष 2001 से 2021 के बीच कृषि स्वरूप में आए व्यापक परिवर्तनों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य कृषि प्रणाली में हुए संरचनात्मक परिवर्तन, फसल प्रतिरूप में आए बदलाव, सिंचाई संसाधनों के विकास, तकनीकी हस्तक्षेप, सरकारी नीतियों के प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न प्रभावों का समग्र विश्लेषण करना है। यह शोध द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें सरकारी कृषि रिपोर्टें, जिला सांख्यिकी विवरण, कृषि विज्ञान केंद्र की रिपोर्टें तथा पूर्व में किए गए शोध कार्यों का तुलनात्मक अध्ययन शामिल किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 2001 में बानसूर तहसील की कृषि मुख्यतः वर्षा आधारित, परंपरागत और सीमित उत्पादन वाली थी, जबकि वर्ष 2021 तक यह कृषि प्रणाली आधुनिक, सिंचित, तकनीकी रूप से उन्नत तथा बाजारोन्मुख बन चुकी है। फसल प्रतिरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया है। पारंपरिक फसलों जैसे बाजरा और ज्वार के स्थान पर गेहूँ, सरसों, सब्जियों तथा बागवानी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ा है। सिंचाई के क्षेत्र में ट्यूबवेल, बोरवेल, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के उपयोग ने कृषि उत्पादन को अधिक स्थिर एवं प्रभावी बनाया है। इसके साथ ही उन्नत बीजों, रासायनिक उर्वरकों तथा कृषि यंत्रीकरण ने कृषि को व्यावसायिक स्वरूप प्रदान किया है। हालाँकि, इस परिवर्तन के साथ कई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं, जिनमें भूजल स्तर में गिरावट, उत्पादन लागत में वृद्धि, मृदा की उर्वरता में कमी तथा जलवायु परिवर्तन के कारण फसल अनिश्चितता प्रमुख हैं। इन समस्याओं ने कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बानसूर तहसील में कृषि स्वरूप में तीव्र एवं बहुआयामी परिवर्तन हुआ है, जो विकास के साथ-साथ नई पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। भविष्य में सतत कृषि विकास, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण तथा संतुलित संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शब्दकोशः कृषि परिवर्तन, बानसूर तहसील, फसल प्रतिरूप, सिंचाई प्रणाली, कृषि यंत्रीकरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, कृषि विकास, सतत कृषि, अलवर जिला।