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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 2 (I) | April - June, 2026 ]

महिला लेखिकाओं के साहित्य में स्त्री चेतना और आत्म पहचानः एक आलोचनात्मक अध्ययन

सुनीता शर्मा (Sunita Sharma)

प्रस्तुत शोधपत्र महिला लेखिकाओं के साहित्य में स्त्री चेतना और आत्म पहचान के विविध आयामों का आलोचनात्मक अ/ययन प्रस्तुत करता है। आधुनिक हिंदी साहित्य में महिला लेखिकाओं ने समाज में स्त्री की बदलती स्थिति, उसके संघर्ष, आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और पहचान के प्रश्नों को अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थवादी दृष्टिकोण से चित्रित किया है। उनके साहित्य में स्त्री केवल एक पारंपरिक भूमिका निभाने वाली पात्र नहीं है, बल्कि वह सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने का प्रयास करती हुई दिखाई देती है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य महिला लेखिकाओं के साहित्य में स्त्री चेतना और आत्म पहचान के स्वरूप को समझना तथा यह विश्लेषण करना है कि उनके लेखन में स्त्री किस प्रकार अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष करती है। इस अ/ययन में महादेवी वर्मा, मन्नू भंडारी, कृष्णा सोबती, अमृता प्रीतम, उषा प्रियंवदा और इस्मत चुगताई जैसी प्रमुख महिला लेखिकाओं के साहित्य को आधार बनाया गया है। इन लेखिकाओं ने अपने उपन्यासों, कहानियों और काव्य रचनाओं के मा/यम से स्त्री जीवन की जटिलताओं, सामाजिक बंधनों, लैंगिक असमानताओं और आत्म पहचान के प्रश्नों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। अ/ययन से यह स्पष्ट होता है कि महिला लेखिकाओं के साहित्य में स्त्री चेतना केवल सामाजिक समस्याओं के चित्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसम्मान, स्वतंत्रता, समानता और आत्मनिर्भरता की भावना से जुड़ी हुई है। स्त्री अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने की क्षमता विकसित करती है और पारंपरिक रूढ़ियों को चुनौती देती है। यह चेतना सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अंततः यह कहा जा सकता है कि महिला लेखिकाओं का साहित्य स्त्री चेतना और आत्म पहचान का सशक्त मा/यम है, जो समाज में स्त्री की भूमिका और स्थिति को नई दिशा प्रदान करता है। उनका लेखन आधुनिक हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।

शब्दकोशः स्त्री चेतना, आत्म पहचान, महिला लेखिकाएँ, हिंदी साहित्य, स्त्री विमर्श, सामाजिक परिवर्तन, नारी अस्मिता।
 


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