ISO 9001:2015

INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 2 (I) | April - June, 2026 ]

वन्यजीव संरक्षण में सिनेमा की भूमिकाः राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (धौलपुर) के विषेष संदर्भ में

अनुपम पाराशर एवं डॉ. सीमा चौहान (Anupam Parashar & Dr. Seema Chouhan)

प्रस्तुत शोध पत्र राजस्थान के सुदूरपूर्वी धौलपुर जिले के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में मिलने वाली दुर्लभ वन्य प्रजातियों का लघु फिल्म, डॉक्यूमेंट्री एवं डिजिटल मा/यम से संरक्षण हेतु चित्रण करता है। सिनेमा जनसंचार का एक सषक्त मा/यम है। यह शोध चंबल अभयारण्य की दुर्लभ प्रजातियों जैसे- स्लॉथ बीयर, स्ट्राइप्ड हाइना, घड़ियाल, इंडियन स्कीमर एवं गंगा डॉल्फिन के प्रति मानवीय संवेदना जागरूक करने तथा सिनेमा के मा/यम से इनके अवैध षिकार को रोकने के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्षित करता है। ‘दस्यु प्रभावित’ इस क्षेत्र की छवि बदलने तथा स्थानीय दुर्लभ जंतु प्रजातियों को वैष्विक पहचान दिलाने में विभिन्न डॉक्यूमेंट्री एवं शॉर्ट फिल्मों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सिनेमा ने धौलपुर के उक्त अभयारण्यों में बलुआ पत्थर खनन, बजरी खनन एवं अवैध षिकार जैसी गतिविधियों पर अंकुष लगाकर वन्यजीवों के प्रति सह-अस्तित्व की भावना विकसित की हैं। इस प्रकार सिनेमा स्थानीय प्राकृतिक धरोहर के दीर्घकालीन संरक्षण का एक सषक्त मा/यम साबित हुआ है।

शब्दकोशः राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, सिनेमा की भूमिका, घड़ियाल जैव विविधता संरक्षण।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.2(I).8868

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/8.2(I).8868


Download Full Paper:

Download