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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 2 (I) | April - June, 2026 ]

सावित्री बाई फुलेः भारत में महिला शिक्षा की योद्धा

Seema Bai Chandaniya

भारतीय समाज एक पेट्रियार्कल समाज है जहाँ महिलाओं को पुरुषों से कमतर माना जाता है और यह एक ऐसा समाज भी है जहाँ जाति व्यवस्था चलती है। छब्त्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल दलितों पर अत्याचार में 19.4ः की बढ़ोतरी हो रही है। इक्विटी वॉचेस रिपोर्ट (2015) से भी पता चलता है कि दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं और अगर दलित महिलाओं के डेटा की बात करें तो यह सबसे खराब है। यह आजाद और डेमोक्रेटिक भारत का डेटा है। इसलिए, उस समय दलित महिलाओं की स्थिति का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है जब भारत आजाद नहीं था। लेकिन, सावित्री बाई फुले, जो निचली जाति से थीं, न केवल निचले वर्ग की महिलाओं के लिए बल्कि समाज की सभी महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित हुईं। वह एक समाज सुधारक और शिक्षिका के रूप में मशहूर हुईं। यह समझा जा सकता है कि सावित्री बाई फुले ने कितने मुश्किल हालात, अत्याचार और भेदभाव झेले होंगे। यह पेपर मिसेज फुले के जीवन, भारत में महिलाओं की शिक्षा में उनके योगदान, समाज सुधार की यात्रा में उनके सामने आई चुनौतियों और आज के समय में उनकी अहमियत पर फोकस करता है।

शब्दकोशः मार्जिनलाइज्ड सेक्शन, महिला एम्पावरमेंट, एजुकेशन, चौलेंज, पेट्रियार्की सोसाइटी।
 


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