राजस्थान, जिसे ऐतिहासिक किलों, महलों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है, अब इको-टूरिज्म (पारिस्थितिकी पर्यटन) के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। थार के रेगिस्तान से लेकर अरावली की प्राचीन पहाड़ियों और घने जंगलों तक, राज्य में अद्वितीय जैव विविधता पाई जाती है। यह शोध पत्र राजस्थान में इको-टूरिज्म की वर्तमान स्थिति, इसके प्रमुख स्थलों, सरकारी नीतियों (विशेष रूप से राजस्थान इको-टूरिज्म नीति 2021), और स्थानीय समुदायों पर इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करता है। इसके साथ ही, यह अ/ययन उन प्रमुख चुनौतियों को भी उजागर करता है जिनका सामना यह क्षेत्र कर रहा है, जैसे कि जल संकट, अति-पर्यटन और मानव-वन्यजीव संघर्ष। अंत में, यह शोध पत्र राज्य में पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है। राजस्थान के संदर्भ में, पर्यटन हमेशा से राज्य की जीडीपी का एक मुख्य आधार रहा है। ऐतिहासिक रूप से, राज्य का पर्यटन स्वर्णिम त्रिभुज (दिल्ली-आगरा-जयपुर) और हेरिटेज होटलों तक सीमित था। हालांकि, पिछले एक दशक में पर्यटकों की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है। अब यात्री प्रकृति के करीब जाना, वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना और स्थानीय ग्रामीण जीवन शैली का अनुभव करना चाहते हैं। राजस्थान की विशिष्ट भौगोलिक संरचना जिसमें प्राचीन अरावली पर्वत शृंखला, विशाल थार मरुस्थल, घने जंगल और नदियां शामिल हैं इसे इको-टूरिज्म के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाती है।
शब्दकोशः इको-टूरिज्म, रेगिस्तान, सरकारी नीतियां, मानव-वन्यजीव, भौगोलिक संरचना।