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INSPIRA-JOURNAL OF COMMERCE,ECONOMICS & COMPUTER SCIENCE(JCECS) [ Vol. 11 | No. 4 | October - December, 2025 ]

भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

कन्हैया लाल मीणा (Kanhaiya Lal Meena)

वैश्विक व्यापार व्यवस्था में टैरिफ (शुल्क) एक महत्वपूर्ण नीति उपकरण है, जिसका उपयोग देश अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा, व्यापार संतुलन बनाए रखने तथा आर्थिक हितों को संरक्षित करने के लिए करते हैं। हाल के वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों, विशेषकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर लगाए गए टैरिफ का वैश्विक व्यापार और आर्थिक संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इस संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव एक महत्वपूर्ण अ/ययन विषय बन गया है।यह शोध-पत्र अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण भारतीय निर्यात, उद्योग, कृषि, विदेशी निवेश तथा रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता है। अ/ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय निर्यात क्षेत्रोंकृजैसे वस्त्र, इस्पात, रसायन, ऑटोमोबाइल और आईटी सेवाओंकृको प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नुकसान हुआ है। इससे न केवल निर्यात आय में कमी आई है, बल्कि छोटे और म/यम उद्योगों (डैडम्) पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।इसके अतिरिक्त, अमेरिकी टैरिफ के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि, बाजार अनिश्चितता और व्यापार असंतुलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। हालांकि, इस स्थिति ने भारत के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के नए अवसर भी प्रदान किए हैं।यह अ/ययन यह निष्कर्ष निकालता है कि अमेरिकी टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती और अवसरकृदोनों प्रस्तुत करता है। प्रभावी व्यापार नीति, निर्यात विविधीकरण, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मा/यम से भारत इन चुनौतियों का समाधान कर सकता है और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को और मजबूत बना सकता है।

शब्दकोशः भारतीय अर्थव्यवस्था, अमेरिकी टैरिफ, वैश्विक व्यापार, निर्यात, औद्योगिक विकास, विदेशी निवेश, व्यापार नीति, आर्थिक प्रभाव।
 


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