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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 1 (II) | January - March, 2026 ]

महिलाएं कार्य एवं सामाजिक भूमिका अपेक्षाएं: नवीन भारतीय परिदृश्य

सविता भदौरिया (Savita Bhadoriya)

पश्चिम से लेकर पूर्व तक जगत की समस्त महिलाओं ने ऐतिहासिक काल से ही रूढ़िवादी परंपराओं को ढोते-ढोते न जाने कितने जीवन व्यतीत कर दिये, किंतु आज भी संरक्षण एवं सुरक्षा नहीं है। युग परिवर्तन के इस दौर में देश की स्वतंत्रता के इतने दशकों बाद भी आधुनिक समाज में महिलाओं की भूमिका घरेलू स्तर पर प्रदत्त एवं कार्यस्थल में अर्जित प्रस्थिति के रूप में व्याप्त है। जिसके परिणाम स्वरुप घर से बाहर कार्यस्थल पर लैंगिग समानता की नई कार्य संस्कृति का जन्म हुआ। भारतीय टाइम यूज सर्वे रिपोर्ट 2024 के अनुसार महिला एवं पुरुष की कार्य सहभागिता दर में व्याप्त अंतर श्रम विभाजन में व्याप्त  लैंगिग असमानता को प्रकट करता है। विश्व बैंक के जेंडर डाटा पोर्टल के अनुसार 187 देश की सूची में भारत 165वे स्थान पर है। गृहिणी एवं कार्मिक की दोहरी भूमिका अपेक्षाओं ने महिलाओं को भूमिका संघर्ष की मनो-सामाजिक समस्या में उलझा दिया है। भारतीय समाज में महिलाओं की पारिवारिक अपेक्षाएं, मातृत्व अपेक्षाएं, वैवाहिक अपेक्षाएं, सांस्कृतिक-धार्मिक अपेक्षाएं तथा व्यक्तिगत अपेक्षाएं होती हैं। भूमिका संघर्ष की तीव्रता भूमिका अपेक्षा की असंगति तथा व्यक्तित्व पर निर्भर करती है प्रस्तुत शोधपत्र के अंतर्गत भारतीय समाज के विविध धर्म एवम् सामाजिक वर्ग में महिलाओ की कार्य आधारित प्रस्थिति, दृष्टिकोण एवम् व्यवहार तथा कामकाजी महिलाओ की संगठित भूमिका के म/य बनने वाले संबंधों एवम भूमिका अपेक्षाओं का अ/ययन कर महिलाओ की कार्य प्रकृति में भूमिका संघर्ष तथा भूमिका अपेक्षा के म/य संबंध को जानना है।

शब्दकोशः भूमिका संघर्ष, भूमिका अपेक्षा, लैंगिक असमानता, सतत् विकास लक्ष्य।
 


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