किसी भी देश का विकास शिक्षा पर निर्भर है। शिक्षा के द्वारा ही मानव का विकास संभव है। भारत में शिक्षा प्रणाली मंे व्यापक सुधार हेतु 1968 में द्वितीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई थी, इसके बाद सन 1986 में द्वितीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है 10़2 जिसे 1992 मंे पुनः संशोधन किया गया। इसके बाद 1986 वाली शिक्षा नीति को बदलकर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 29 जुलाई 2020 को लागू हुई जिसमें कक्षा 10 के बाद के दो वर्ष को बदलकर 5$3$3$4 का नया ढांचा लागू किया गया है। इस नीति का उददेश्य एक ऐसा शिक्षा तंत्र बनाना है जो भारतीय मूल्यों पर आधारित है और सभी को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा देकर भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने में मदद करें। यह शिक्षा नीति भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिक के कस्तूरी रंगन की अ/यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत वर्ष 2030 तक एकल नामांकन अनुपात (जी ई आर) को 100 प्रतिशत लाने का लक्ष्य रखा गया है। तथा शिक्षा क्षेत्र पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 6 प्रतिशत हिस्से के सार्वजनिक व्यय का लक्ष्य रखा गया है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मिड डे मिल योजना का विस्तार प्री प्राइमरी स्तर तक करने और इसमें नाश्ता शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर अधिक /यान दिया जा सकें। मिड डे मिल योजना को राष्ट्रीय पोषण मिशन जिसे अब पीएम पोषण के नाम से जाना जाता है, के रूप में पुनर्गठित किया है। जिसमें पोषण पर अधिक जोर दिया गया है।
शब्दकोशः राष्ट्रीय शिक्षा नीति, पीएम पोषण योजना, प्री प्राइमरी, स्वास्थ्य।