आदि मानव से लेकर वर्तमान मानव जीवन की विकास अवस्था का अ/ययन करने से ज्ञात होता है, कि मनुष्य का जीवन संघर्षो से होकर गुजरा है। मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरन्तर संघर्ष करता आ रहा है, तथा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वह नित नवीन आविष्कारों का सृजन करता है। नये-नये प्रयोगों द्वारा वह अपने कार्यों में निपुणता लाता है। इसलिए कहा भी गया है कि ‘‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी हैं।’’ आवश्यकताओं को /यान में रखकर ही मनुष्य द्वारा नवप्रवर्तन किये जाते हैं। आदिम मानव ने भोजन पकाने के लिए आग, आवास के लिए प्रकृति प्रदत्त गुफाओं, सुरक्षा के लिए तीर कमान जैसे आवश्यक उपकरणों का आविष्कार किया। ये आविष्कार मानव की कार्यकुशलता का ही प्रमाण है। आदिम समाज का ये कौशल केवल मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति तक ही सीमित था।
शब्दकोशः कौशल विकास, मानव जीवन, नवीन आविष्कार, आदिम समाज।