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कौशल विकास एवं आय सृजनः झुंझुनू जिले के विशेष संदर्भ में

शेरसिंह एवं डॉ. श्वेता (Sher Singh & Dr. Shweta)

विश्व के बदले हुए आर्थिक परिदृश्य में कौशल विकास का क्षेत्र व्यापक हो गया हैं। प्रत्येक देश अपनी आर्थिक नीति में कौशल विकास को महत्व दे रहा है। कौशल विकास पर विश्व में सबसे अधिक कार्य एशिया महाद्वीप के चीन में हुआ है। इसी कारण से विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश होने के बाद भी उसकी आर्थिक वृद्धि की दर 8 से 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष आंकी गई है। इसी वजह से चीन एक विकसित, आर्थिक शक्ति सम्पन देश कहलाता है। भारत जैसे जनसंख्या बाहुल्य देश, जिसकी अधिकांश जनसंख्या का भाग युवा है जिसमें अनेक क्षमतायें विद्यमान हैं। इस क्षमता का उपयुक्त तरीके से उपयोग करने तथा अधिक से अधिक लोगांे को रोजगार देने के लिए कौशल विकास की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कौशल विकास से व्यक्ति की उद्यमिता का विकास होता है, जिससे नये रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। रोजगार को बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा अनेक योजनायें बनाई गई हैं, जिनको विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के मा/यम से लागू किया गया हैं। इनमें ग्रामीण रोजगार योजना, जवाहर शहरी रोजगार योजना तथा प्रसिद्व मनरेगा योजना प्रमुख हैं। ये योजनायें प्रभावशाली होते हुए भी इसका अपेक्षित लाभ न तो लोगों को प्राप्त हो सका है और ना ही देश के विकास की गति इतनी बढ़ पायी है। इन योजनाओं के तभी सफल होने की सम्भावना है, जब लोगांे की कार्यदक्षता में सुधार लाया जाता है। प्रस्तुत शोध में राजस्थान में कोशल विकाश से विभिन्न कोशल विकास पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित युवाओं की आय में हुए परिवर्तन का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

शब्दकोशः कौशल विकास, आय सृजन, रोजगार, आर्थिक नीति, जनसंख्या।
 


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