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सूचना युग में शिक्षा और शिक्षणः एक सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण

गीता देवी मांडीवाल (Geeta Devi Mandiwal)

वर्तमान सदी को सूचना युग कहा जाता है, जिसमें सूचना और ज्ञान किसी भी समाज की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति के प्रमुख आधार बन गए हैं। डिजिटल प्रौद्योगिकी, इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संचार नेटवर्क ने शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप को मौलिक रूप से परिवर्तित कर दिया है। परंपरागत कक्षा-केंद्रित, शिक्षक-प्रधान और पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा अब शिक्षार्थी-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-सहायित और आजीवन सीखने की प्रक्रिया में परिवर्तित हो रही है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सूचना युग में शिक्षा एवं शिक्षण की अवधारणा, इसके सैद्धान्तिक आधार, नवीन प्रवृत्तियाँ, भारतीय परिप्रेक्ष्य, अवसरों और चुनौतियों का समग्र अ/ययन करना है। शोध से यह स्पष्ट होता है कि सूचना युग ने शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला, व्यक्तिगत और वैश्विक बनाया है, परंतु डिजिटल विभाजन, नैतिक संकट, शिक्षक प्रशिक्षण की कमी तथा तकनीकी निर्भरता जैसी समस्याएँ इसके समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ हैं। अतः आवश्यकता है कि शिक्षा नीति, शिक्षक विकास और डिजिटल अवसंरचना में संतुलित सुधार कर मानव-केंद्रित सूचना युगीन शिक्षा प्रणाली विकसित की जाए।

शब्दकोशः सूचना युग, डिजिटल शिक्षा, शिक्षण-प्रौद्योगिकी, ई-लर्निंग, ज्ञान समाज, नवाचार, समावेशी शिक्षा।
 


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