आधुनिकीकरण की अवधारणा का प्रार्दुभाव द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से मानाा जाता है। यह मुख्य रूप से एक सांस्कृतिक परिवर्तन की प्रक्रिया है जो तार्किक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा नवीन सामाजिक मूल्य व मानक पैदाक रती है। इन नवीन मूल्यों के प्रभाव से ही सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक व्यवस्था में परिवर्तन होता है। आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया में समाज को तकनीकी, शैक्षिक व आथ्रिक् रूप से तो उन्नत किया है परन्तु समाज के कुछ वर्गों विशेषकर बुजुर्गों की प्रस्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य आधुनिकीकरण के प्रभावों के संदर्भ में वृद्धजनों की बदलती प्रस्थिति, समस्याओं व नवीन भूमिकाओं का समाजशास्त्रीय अ/ययन करना है।
आधुनिकीकरण, वैश्वीकरण, नगरीकरण, वृद्धजन, संयुक्त परिवार, सामाजिक मूल्य, प्रस्थिति, भूमिका।