राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र में सिद्धमुख नहर परियोजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के स्वरूप में गहरा परिवर्तन लाया है। इस क्षेत्र में पूर्व में कृषि मुख्यतः वर्षा-आधारित थी, जिसके कारण उत्पादन अस्थिर और सीमित रहता था। नहर के मा/यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर रुख किया है, जिससे उनकी आय में वृद्धि और आर्थिक स्थिरता आई है। जल की निरंतर उपलब्धता ने फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया है, और कृषि से जुड़ी सहायक गतिविधियों जैसे पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, तथा कृषि सेवाओं में भी विस्तार हुआ है। रोजगार के क्षेत्र में सिद्धमुख नहर ने ग्रामीण श्रम शक्ति को नए अवसर प्रदान किए हैं। खेती के साथ-साथ कृषि प्रसंस्करण, परिवहन और विपणन से संबंधित कार्यों में भी रोजगार सृजन हुआ है। इससे ग्रामीण बेरोजगारी और पलायन की समस्या में कुछ हद तक कमी आई है। विशेष रूप से महिला श्रमिकों की भागीदारी में भी वृद्धि देखी गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय-संरचना अधिक सुदृढ़ हुई है। भूमि उपयोग पैटर्न में भी महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए हैं। परती भूमि घटकर कृषि योग्य भूमि में परिवर्तित हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में जल-जमाव और भूमि लवणता जैसी नई चुनौतियाँ भी उभरी हैं। समग्र रूप से, सिद्धमुख नहर ने क्षेत्रीय कृषि प्रणाली को अधिक उत्पादनशील और बाजारोन्मुख बनाया है। यह अ/ययन इन परिवर्तनों का आर्थिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है और इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि नहर आधारित सिंचाई ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त किया है, किंतु इसकी स्थिरता के लिए जल प्रबंधन एवं नीति सुधारों की निरंतर आवश्यकता बनी हुई है।
शब्दकोशः सिद्धमुख नहर, सिंचाई प्रणाली, कृषि विकास, भूमि उपयोग में परिवर्तन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता।