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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS)

कृषि प्रगति एवं पर्यावरण प्रभाव के संदर्भ में एक अ/ययन

धर्मेन्द्र कुमार शर्मा (Dharmendra Kumar Sharma)

कृषि प्रगति पर पर्यावरण प्रभाव के संदर्भ में सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि पर्यावरण क्या है? इसके लिए हमें शब्द ’’जैव विविधता’’ का अर्थ और विस्तार जानना आवश्यक है। स्पष्टतः आधारभूत प्राकृतिक संसाधनों, जैसे वायु, जल, वन आदि के अलावा जैव विविधता में बहुत से अन्य जीव और सूक्ष्मजीव शामिल हैं, जो सभी धारणीय तरीके में पर्यावरण संतुलित रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं। उच्चतर कृषि उत्पादन प्राप्त करने की पद्धतियांँ बृहŸार पारितंत्र पद्धति को कितना प्रभावित कर सकती हैं? इस लेखपत्र में इस विषय से संबंधित अ/ययन किया गया है।
लेख के शोध प्रश्न: (1). पर्यावरण पर कृषि प्रगति का प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कारकों की पहचान करना (2). पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव करने वाली कृषि क्रियाओं का वर्णन करना (3). पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने वाले निवेशों के सघन प्रयोग से संबद्ध कारकों को स्पष्ट करना (4). धारणीय कृषि प्रगति के बाधाकारीhttps://updes.up.nic.in/पुनःस्थापक मुद्दों से संबंधित नीतिगत समस्याओं की रूपरेखा को समझाना।

शब्दकोशः जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरण, कृषि, सूक्ष्मजीव।
 


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