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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 6 | No. 2 (II) | April - June, 2024 ]

सूफीवाद और सूफीवाद के विभिन्न संप्रदायः एक परिचयात्मक अ/ययन

अमर सिंह एवं डॉ. मीना अम्बेश (Amar Singh & Dr. Meena Ambesh)

सूफी वे कहलाएं, जो सफेद ऊन का कपड़ा पहनते थे।’’ उनके सीधे, साधारण कपड़े पहनने का मतलब यह था कि ये वे लोग थे, जो सीधे और सरल वस्त्र धारण करते थे, सीधी सरल जिंदगी जीते थे और लोगों को सीधे सरल तरीके से, प्रेम पूर्वक रहने को प्रेरित करते थे। सूफी संतों ने इस्लाम के एकेश्वरवाद का पालन किया। ये आमतौर पर वे थे जिन्होंने मुस्लिम धार्मिक विद्वानों द्वारा स्थापित इस्लामिक परम्परा की जटिलताओं और आचार संहिता का विरोध किया। सूफी संतों ने धर्म के बाहरी आडम्बर को त्याग कर भक्ति और सभी मनुष्यों के प्रति दया तथा प्रेम भाव पर बल दिया। संत कवियों की तरह राजस्थान में सूफी संत भी अपनी बात कविता के जरिये कहते थे। वे अपना संदेश लोगों तक कहानी सुना कर भी पहुँचाते थे। सूफियों के बारे में यह भी प्रचलित है कि इनमें कई दिव्य शक्तियाँ है। इन शक्तियों को लेकर अनेक तरह के किस्से कहानियाँ भी सूफी संतो के बारे में फैली है। सूफियों में किसी उस्ताद, औलिया या पीर की देख रेख में अलग-अलग तरह से दिव्य शक्ति के नजदीक आने के तरीके विकसित हुए। कभी नाचकर, कभी गाकर, तो कभी केवल मनन-चिंतन करक,े उस्ताद पीढ़ी दर पीढ़ी शागिर्दो को सीख देते थे। इस तरह कई सिलसिलों की शुरूआत हुई। हर सिलसिले का काम करने का, विचारों का, अपना ही तरीका होता था। धीरे-धीरे हिन्दुस्तान में म/य एशिया से भी सूफी आने लगे। ग्यारहवीं सदी तक हिन्दुस्तान दुनिया में सूफी सिलसिलों के लिए जाना जाने लगा।

शब्दकोशः सूफीवाद, साधना, एकेश्वरवाद, संप्रदाय, सार्वभौमिक, आ/यात्मिकता, सिद्धांत।


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